न हि नमस्कारमतिदेवाः, ते ह नमसिताः कर्त्तारमतिसृजन्तीति। तत एतं प्रजापतिं यज्ञं प्रपद्यते, नमो नम इति। न हि नमस्कारमतिदेवाः, स तत्रैव यजमानः सर्वान् कामानाप्नोति सर्वान् कामानाप्नोति।
(गोपथ ब्राह्मणम् २.२.१८)
देवता नमस्कार को तिरस्कार करके नहीं रहते। वह अवश्य नमस्कार करनेवाले को आशीर्वाद देते हैं। फिर इस प्रजापति यज्ञ में (यजमान) पहुंचता है, नमस्कार करता है। देवता नमस्कार का तिरस्कार करके नहीं रहते। वह (यजमान) उस (नमस्कार करने में) सब मनोरथों को पाता है।
Deities don't ignore one who bows before them. They bless one who bows before them. Whenever one, who performs a Yajna, enters this Yajna of Prajapati, and bows before the deities, the deities don't ignore him. They bless him with all of his wishes fulfilled.
(गोपथ ब्राह्मणम् २.२.१८)
देवता नमस्कार को तिरस्कार करके नहीं रहते। वह अवश्य नमस्कार करनेवाले को आशीर्वाद देते हैं। फिर इस प्रजापति यज्ञ में (यजमान) पहुंचता है, नमस्कार करता है। देवता नमस्कार का तिरस्कार करके नहीं रहते। वह (यजमान) उस (नमस्कार करने में) सब मनोरथों को पाता है।
Deities don't ignore one who bows before them. They bless one who bows before them. Whenever one, who performs a Yajna, enters this Yajna of Prajapati, and bows before the deities, the deities don't ignore him. They bless him with all of his wishes fulfilled.